विश्व अस्थमा दिवस २०१:: दम रोग लक्षणहरू पहिचान गर्नुहोस् असाध्य छैन, यसलाई निदान गर्नुहोस्


विश्व अस्थमा दिवस २०१:: दम रोग लक्षणहरू पहिचान गर्नुहोस् असाध्य छैन, यसलाई निदान गर्नुहोस्

7 मई को वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया जाता है। यह सच है कि दमा को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन बचाव और इलाज द्वारा काफी हद तक इसपर कंट्रोल कर अच्छी लाइफ जी सकते हैं।

दमा (अस्थमा) ऐसा मर्ज है, जो बच्चों से लेकर किसी भी आयुवर्ग के व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। बढ़ते प्रदूषण और अनेक कारणों से दमा का मर्ज पूरी दुनिया में तेजी से फैलता जा है। देश में ही तीन करोड़ लोग दमा से ग्रस्त हैं। यह सच है कि दमा को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे नियंत्रित कर पीडि़त लोग सहजता से जीवन जी सकते हैं।

खिलते हुए फूलों की खुश्बू और रंगत से सभी का दिल बाग-बाग हो जाता है। मगर बदलते मौसम के ये कुदरती तोहफे परेशानी का सबब बन जाते हैं। कुछ ऐसी ही दिक्कत से दो-चार होते हैं बच्चे और वयस्क जो अपने हमउम्र दोस्तों की तरह बेखटके आइसक्रीम का मजा नहीं ले सकते। वे फिर भी खुशनसीब हैं कि डॉक्टरों ने उनमें एलर्जी को उकसाने वाली उन खास चीजों की पहचान कर ली है, जिनकी वजह से उन्हें सांस फूलने यानी दमा(अस्थमा)की शिकायत हो जाती है। न जाने कितने लोग ऐसे भी हैं, जो यह समझ ही नहीं पाते कि आखिर उनकी सांस क्यों फूलती-उखड़ती है और वे इसे कमजोरी का लक्षण मानकर ‘ताकतवर चीजें’ खाकर शरीर को मजबूत बनाने की बेतुकी कोशिश में लगे रहते हैं। मर्ज का आधा इलाज तो यही होता है कि उसे ठीक से समझ लिया जाए, शेष काम दवाइयां और चिकित्सक के हवाले होता है।

आइए जानें कि आखिर दमा है क्या

अस्थमा (दमा)एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी की सांस नलियों में कुछ कारणों के प्रभाव से सूजन आ जाती है। इस कारण रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। जिन कारणों से दमा की समस्या बढ़ती है, उन कारणों को एलर्जन्स कहते हैं। ऐसे कारणों में धूल (घर या बाहर की) या पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी-जुकाम, धूमपान, फास्टफूड, मानसिक चिंता, व्यायाम, पालतू जानवर और पेड़ पोधों और फूलों के परागकण आदि प्रमुख होते हैं।

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कारण

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आनुवांशिक और पारिवारिक कारण। जैसे परिवार के किसी सदस्य को दमा रहा हो, तो दूसरे सदस्य में दमा से ग्रस्त होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा दमा की समस्या को बढ़ाने वाले तीन प्रमुख कारण होते हैं।

1.घर के अंदर के कारण (इनडोर एलर्जन)

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हाउॅस डस्ट माइट यानी घरेलू धूल में उपस्थित कीट। जानवरों के शरीर पर उपस्थित एलर्जन कॅाकरोच।

2.बाह्य कारक (आउटडोर एलर्जन)

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पौधों के फूलों में पाए पाये जाने वाले सूक्ष्म कणों को परागकण कहते हैं, जो एलर्जी के प्रमुख कारण हैं।

विभिन्न लोगों में कुछ खाद्य पदार्थों को ग्रहण करने से भी दमा की समस्या बढ़ती है। जैसे अनेक लोगों को अंडा, मांस, मछली, फास्ट फूड्स, शीतल पेय और आइसक्रीम आदि खाने दमा की समस्या बढ़ जाती है।

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3. अन्य कारण

इनके अंतर्गत वाइरस (जैसे राइनोवाइरस आदि) और जीवाणुओं का संक्रमण, कुछ दवाएं जैसे एस्पिरिन, तनावग्रस्त रहना आदि को शामिल किया जाता है। एसिडिटी, प्रदूषण, धूम्रपान,अत्यधिक मोटापा और कुछ हार्मोन्स के कारण भी दमा की समस्या बढ़ सकती है।

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लक्षण

जब दमा के कारक मरीज के संपर्क में आते हैं, तो शरीर में मौजूद विभिन्न रासायनिक पदार्थ (जैसे हिस्टामीन) स्रावित होते हैं। इस कारण सांस नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं। सांस नलिकाओं की भीतरी दीवार में लालिमा और सूजन आ जाती है और उनमें बलगम बनने लगता है। इन सभी से दमा के लक्षण पैदा होते हैं, जो इस प्रकार हैं।

सांस लेने में कठिनाई, जो दौरों के रूप में तकलीफ देती है।

खांसी जो रात में गंभीर हो जाती है।

सीने में कसाव या जकड़न।

सीने में घरघटाहट जैसी आवाज आना।

गले से सीटी जैसी आवाज आना।

बार-बार जुकाम होना।

डायग्नोसिस

दमा का पता अधिकतर लक्षणों के आधार पर भी किया जाता हे। एक परीक्षण सीने में आला लगाकर और म्यूजिकल साउंड (रॉन्काई) सुनकर किया जाता है। इसके अलावा फेफड़े की कार्यक्षमता की जांच (पी.ई.एफ.आर. और स्पाइरोमेट्री) द्वारा की जाती है। अन्य जांचों में रक्त की जांच, छाती और पैरानेसल साइनस का एक्सरे आदि की जाती हैं।

इन बातों पर दें ध्यान

दमा की दवा हमेशा अपने पास रखें और कंट्रोलर इन्हेलर हमेशा समय से लें।

सिगरेट और सिगार के धुएं से बचें और प्रमुख एलर्जन्स से बचें।

अपने फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए सांस से संबंधित व्यायाम करें।

बलगम गाढ़ा हो गया है, खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाए या रिलीवर इनहेलर की जरूरत बढ़ गई हो, तो शीघ्र ही अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

बचाव

मौसम बदलने से सांस की तकलीफ बढ़ती है। इसलिए मौसम बदलने के 4 से 6 सप्ताह पहले ही सजग हो जाना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

इनहेलर व दवाएं विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।

ऐसे कारक जिनकी वजह से सांस की तकलीफ बढ़ती है या जो सांस के दौरे को पैदा करते हैं उनसे बचें। जैसे धूल, धुंआ, गर्द, नमी, धूम्रपान आदि। ऐसे खाद्य पदार्थ, जो रोगी की जानकारी में स्वयं आ जाते है कि वे नुकसान कर रहे हैं, उनसे परहेज करना चाहिए।

सेमल की रुई युक्त बिस्तरों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। कारपेट, बिस्तर व चादरों की नियमित और सोने से पूर्व अवश्य सफाई करनी चाहिए।

व्यायाम या मेहनत का कार्य करने से पहले इनहेलर अवश्य लेना चाहिए।

बच्चों को लंबे रोएंदार कपड़े न पहनाएं और रोऐंदार खिलौने खेलने को न दें।

घर की सफाई, पुताई व पेंट के समय रोगी को घर से बाहर रहना चाहिए।

इनहेलर थेरेपी

दमा का उपचार आमतौर पर इनहेलर से होता है, जो दमा की दवा लेने का सर्वश्रेष्ठ और सबसे सुरक्षित तरीका है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इनहेलर के जरिए दवा व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंचती है और यह तुरंत असर दिखाना शुरू कर देती है। यह ध्यान देने योग्य है कि इनहेलेशन थेरेपी में, सीरप और टैब्लेट्स की तुलना में 10 से 20 गुना तक कम खुराक की जरूरत होती है और यह अधिक प्रभावी होती है।

इनहेलर दो प्रकार के होते हैं

1.रिलीवर इनहेलर: ऐसे इनहेलर जल्दी से काम करके सांस नलिकाओं की मांसपेशियों का तनाव ढीला करते हैं और तुरन्त असर करते है। इनको सांस फूलने पर लेना होता है।

2.कंट्रोलर इनहेलर: ये सांस नलियों में सूजन घटाकर उन्हें अधिक संवेदनशील बनने से रोकते हैं और दमा के गंभीर दौरे का खतरा कम करते है। इनको लक्षण न होने पर भी लगातार लेना चाहिए।

टैबलेट की जरूरत

दमा के इलाज में ज्यादातर लोगों को टैब्लेट्स की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसा इसलिए, क्योंकि इनहेलर सामान्यत: अच्छी तरह से कार्य करते हैं। बावजूद इसके कुछ मामलों में यदि दमा से पीडि़त व्यक्ति में कुछ लक्षण मौजूद रहते हैं, तो इनहेलर के अलावा टैब्लेट लेने की भी सलाह दी जाती है। कभी-कभी तीव्र(एक्यूट) दमा के दौरे को कम करने के लिए स्टेरॉइड टैब्लेट थोड़े वक्त के उपचार के लिए दी जाती हैं। वस्तुत: कुछ लोगों में लक्षण सिर्फ इसलिए मौजूद रहते हैं क्योंकि वे अपने इनहेलर का प्रयोग ठीक प्रकार से नहीं करते हैं। इस कारण इनहेलर से दवा ठीक प्रकार से सांस नलियों में नहीं पहुंच पाती। इसलिए अपने इनहेलर का ठीक प्रकार से इस्तेमाल करना अपने डॉक्टर से सीखें।

डॉ.एस.पी. राय सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई

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