लखनऊ माछाको लागि माछा: विशेष ‘लखनऊ’ माछा लामखुट्टेहरू हटाउन आएका छन्


लखनऊ माछाको लागि माछा: विशेष 'लखनऊ' माछा लामखुट्टेहरू हटाउन आएका छन्

लखनऊ माछा लामखुट्टेका लागि यी विशेष माछाले लार्भालाई आफैंको खाना बनाएर लामखुट्टे रोक्न रोक्दछ। साथै, लामखुट्टे मार्न औषधी परिवर्तन गर्ने तयारी भइरहेको छ।

नई दिल्ली, जेएनएन। लखनऊ माछा मच्छरका लागि: मच्छरों की फौज ने दुनिया के लगभग हर देश को खतरे में डाल दिया है। खासकर बारिश के मौसम में बुखार, डायरिया, डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों से त्रस्त मरीजों की भीड़ इसका प्रमाण है। इससे बचने के लिए सरकार सहित आम लोग कई तरह के उपाय अपनाते हैं। 

ये खास मच्छली है मच्छरों को इलाज

हालांकि, इस बार चिकित्सा विभाग ने डेंगू और मलेरिया के मच्छर को पनपने से पहले ही खत्म करने की तैयारी खास कर ली है। इस अभियान में गैंबूसिया मछली मदद करेंगी। इन मछलियों को विभाग ऐसे साफ पानी में छोड़ेगा, जहां मच्छर का लार्वा पनप सकता है। ये मछलियां लार्वा को अपनी खुराक बनाकर मच्छरों को पनपने से रोकेंगी। साथ ही मच्छरों को मारने के लिए दवा में भी बदलाव करने की तैयारी चल रही है।  

बारिश शुरू होते ही मच्छरों का पैदा होना शुरू हो जाता है। तालाबों के अलावा दूसरी जगह भरे पानी में पनपने वाले मच्छर डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने की वजह बनते हैं। इसलिए इस बार चिकित्सा विभाग ने तालाबों और साफ पानी में गैंबूसिया मछली छोड़ने का फैसला लिया है। कई जिलों में इन मछलियों को छोड़ा भी गया है। इससे डेंगू के मरीजों की संख्या में कमी भी आई है। इसी वजह से गौतमबुद्ध नगर में भी यह प्रयोग किया जाएगा। मच्छर का लार्वा इस मछली का पसंदीदा भोजन है। 

पिछले दो साल में बढ़ें हैं डेंगू के मामले 

साल 2017 में डेंगू के मरीजों की संख्या महज 13 थी। 2018 में यह दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 28 हो गई। इसे देखते हुए ही मलेरिया विभाग ने गैंबूसिया मछली को मंगवाने का निर्णय लिया है। 

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