हर वक्त थकान लगने की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें इसकी वजह और क्या है इलाज


हर वक्त थकान लगने की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें इसकी वजह और क्या है इलाज

यूं तो क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन यह अधेड़ स्त्रियों को अधिक परेशान करता है। क्या हैं इसके लक्षण और इलाज जानते हैं यहां।

यूं तो कभी-कभी थकान सभी को महसूस होती है लेकिन कुछ लोगों में यह लगातार बनी रहती है। हमेशा थकान बने रहने की यह स्थिति क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम कहलाती है। यह थकान की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को लगातार छह महीने या उससे अधिक समय से थकान रहती है और कई बार यह इतना गंभीर रूप ले लेती है कि सामान्य कामकाज में भी दिक्कत आती है। भरपूर आराम और नींद भी राहत महसूस नहीं होने देती।

कब होती है यह

यह समस्या यूं तो किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन अधेड़ स्त्रियों को अधिक परेशान करती है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब एक तिहाई स्त्रियां लगातार थकान बने रहने की शिकायत करती हैं। इनमें से आधी महिलाओं को यह समस्या छह महीने से अधिक समय से है। हालांकि इसके कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ शोध बताते हैं कि मानसिक तनाव, वायरल संक्रमण के अलावा कई अन्य कारण इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।

कमज़ोर इम्यून सिस्टम: खराब रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को यह समस्या ज़्यादा प्रभावित करती है। ज़रा सी बात या काम का दबाव बढ़ते ही इन्हें थकान महसूस होने लगती है।

इन्फेक्शंस: कुछ बैक्टीरियल इन्फेक्शंस भी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लिए जि़म्मेदार होते हैं।

ब्लड प्रेशर: लो बीपी की समस्या से परेशान लोगों को भी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।

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तनाव: लगातार तनाव में रहने की वजह से भी सीएफएस की समस्या हो सकती है।

हॉर्मोन्स का असंतुलन: शोधों के मुताबिक कई बार शरीर की ग्रंथियों द्वारा हॉर्मोन्स न बनाने या हॉर्मोन्स असंतुलन की वजह से भी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम गिरफ्त में ले सकता है। क्रॉनिक फटीग से परेशान लोगों के हाइपोथेलेमस, पिट्यूट्री ग्लैंड और एड्रिनल ग्लैंड में हॉर्मोन असंतुलित मात्रा में उत्पन्न होते हैं।

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कब जाएं डॉक्टर के पास

चूंकि सीएफएस जांच के लिए कोई मेडिकल टेस्ट उपलब्ध नहीं है और इसके लक्षण कई अन्य बीमारियों से मेल खाते हैं इसलिए डॉक्टर्स के लिए पहचान मुश्किल होती है। फिर भी जब लंबे समय तक थकान महसूस हो और आराम के बाद शरीर में ऊर्जा का संचार न हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

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लाइफस्टाइल में करें बदलाव

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निश्चित इलाज न होने के कारण जीवनशैली में बदलाव के ज़रिये ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सीएफएस से परेशान लोगों को कैफीन बेहद कम मात्रा में लेना चाहिए। एल्कोहॉल और निकोटिन से भी दूरी बरतनी चाहिए। थकान और सुस्ती महसूस होने पर भी दिन में नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे रात की नींद प्रभावित होती है। सीएफएस से होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर कुछ दर्द निवारक दवाएं ले सकते हैं।

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योग, ताइची और मसाज के ज़रिये सीएफएस के दर्द से राहत पा सकते हैं। लेकिन कोई भी चीज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

लक्षण

1. पेट में दर्द, आंतों में समस्या, मितली, डायरिया और पेट फूलने जैसा एहसास

2. एलर्जी अथवा खाने की चीज़ों के प्रति संवेदनशीलता, एल्कोहॉल, खुशबू, केमिकल दवाओं और शोर के प्रति

3. संवेदनशीलता बढऩा।

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4. ठंड लगना और रात में पसीना आना।

5. छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, और लंबे समय तक खांसी रहना

6. डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, अवसाद आदि

7. काम करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होना। कभी-कभी बिलकुल काम न कर पाना

8. स्लीप डिसॉॅर्डर

9. याददाश्त कमज़ोर पडऩा

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10. धुंधला दिखाई देना, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, आंखों में दर्द या रूखापन।

डॉ. आर.आर दत्ता (एचओडी, इंटरनल मेडिसिन पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम)

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