प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बहुत ही जरूरी है ये पोषक तत्व, न करें इन्हें अवॉयड


प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बहुत ही जरूरी है ये पोषक तत्व, न करें इन्हें अवॉयड

प्रेंग्नेंसी में संतुलित आहार का होना बहुत जरूरी है क्योंकि इसकी कमी शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और कई प्रकार के विकार उत्पन्न होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान स्त्री का शरीर अनेक बदलावों से गुजरता है। इन शारीरिक और हॉर्मोनल बदलावों से सामंजस्य बिठाने के क्रम में यह आवश्यक है कि गर्भवती मां को संतुलित पोषण मिले, क्योंकि यही उसके गर्भ में पल रहे शिशु के पोषण का मुख्य स्रोत भी होता है। गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार इसलिए भी जरूरी है कि ऐसा न होने से गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और कई प्रकार के विकार उत्पन्न होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है।

फोलेट

फोलेट को फोलिक एसिड भी कहा जाता है। इसकी कमी गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। फोलिक एसिड या फोलेट को विटामिन बी9 का सिंथेटिक फॉर्म कहा जाता है। इसकी कमी गर्भस्थ शिशे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है और गर्भावस्था में मैक्रोसाइटिक एनीमिया व गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क व रीढ़ के विकास में दोष उत्पन्न हो सकता है। गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक व सिट्रस फलों में यह अच्छी मात्रा में पाया जाता है। डॉक्टर विशेष रूप से प्रथम तीन माह में गर्भवती स्त्री को संतुलित आहार के साथ अतिरिक्त फॉलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं।

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कैल्शियम

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यह गर्भस्थ शिशु की हड्डियों के निर्माण और गर्भवती स्त्रियों के बॉडी फ्लूइड को बैलेंस रखने में अहम भूमिका निभाता है। दूध व उससे निर्मित उत्पादों जैसे दही, योगर्ट के अलावा चीज, टोफू में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। डाक्टर कहते हैं कि गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में कैल्शियम की विशेष खुराक पर जोर देना चाहिए।

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आयरन

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यह तत्व सोडियम, पोटेशियम और पानी के साथ क्रियाशील होकर शरीर में रक्त संचार में तेजी लाने का काम करता है। इससे गर्भवती स्त्री और गर्भस्थ शिशु तक ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हरी पत्तेदार सब्जियों, खट्टे फलों, सूखे मेवे में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

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प्रोटीन

गर्भस्थ शिशु की कोशिकाओं और मस्तिष्क के विकास के लिए प्रोटीन अहम पोषक तत्व है। यह शरीर में रक्त के प्रवाह में तेजी लाने में भी मदद करता है। फलस्वरूप गर्भ में पल रहे शिशु तक रक्त संचार समुचित तरीके से होता है। इसलिए डॉक्टर रोजाना कम से कम प्रोटीन की तीन सर्विंग की सलाह देते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों, सूखे मेवों, विभिन्न प्रकार की बीन्स में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

दो की खुराक की जरूरत नहीं

आमतौर पर लोग यह कहते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां को दो लोगों की खुराक लेनी चाहिए, पर ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है। गर्भवती स्त्री को संतुलित आहार के साथ गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में आमतौर पर 300 अतिरिक्त कैलोरीज की आवश्यकता होती है। इससे अधिक भोजन भी हानिकारक हो सकता है। यह मोटापे का कारण बनता है और मोटापाग्रस्त महिलाओं के साथ गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न होती हैं एवं उनके साथ गर्भपात होने का खतरा भी अधिक रहता है। ऐसी महिलाओं के साथ हाई ब्लड प्रेशर और गेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा रहता है।

इसके सेवन से बचें

गर्भावस्था के दौरान कैफीनयुक्त तरल पदार्थों की मात्रा सीमित करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उसमें ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जिसकी वजह से शरीर को आयरन एब्जा‌र्ब्व करने में दिक्कत होती है। इसकी वजह से सीने में जलन की तकलीफ भी पेश आ सकती है।

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